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" इंकलाब की चाह " (आप का इंकलाब )

Posted On: 15 Apr, 2014 Others में

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मध्य पूर्व में चल चुका  इंक्लाबों का दौर
जो कुछ था वह लुट गया बर्बादी चहूँ और
खून बहा लाखों का धरती लहूँ लुहान
ऐसे ही सपने दिखाते “आप ” के श्री मान
भारत देेश मनीषियों का भटके ना यह राह
ऐसी कृपा करें हम पर हे   भगवान

मध्य पूर्व में चल चुका  इंक्लाबों का दौर

जो कुछ था वह लुट गया बर्बादी चहूँ और

खून बहा लाखों का धरती लहूँ लुहान

ऐसे ही सपने दिखाते “आप ” के श्री मान

भारत देेश मनीषियों का भटके ना यह राह

ऐसी कृपा करें हम पर हे   भगवान      DR.Ashok Bhardwaj

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

utkarshini के द्वारा
July 15, 2014

Very well said.

drashok के द्वारा
July 15, 2014

Thank you very much keja DR Ashok

Gerri के द्वारा
October 17, 2016

Planiseg to find someone who can think like that


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