Manthan

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drashok


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नोट बंदी से समाज का कौन सा वर्ग खुश है

Posted On: 3 Dec, 2016  
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काले धन के खुमार का अवसान

Posted On: 21 Nov, 2016  
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माँ बस माँ होती है

Posted On: 3 Oct, 2015  
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दूध , खोया (मावा ) या चाकलेट

Posted On: 2 Mar, 2015  
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Junction Forum Others social issues न्यूज़ बर्थ में

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हवाई वादे कुटिल इरादे

Posted On: 2 Feb, 2015  
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Junction Forum Others social issues कविता में

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आदरणीय डॉ अशोक भारद्वाज जी ! इस उपयोगी लेख के लिए बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई ! आपने सही लिखा है कि हमारे देश में लोग अपने स्वास्थ्य से बहुत लपवाही करते हैं ! तीन साल पहले अपने पिताजी और माताजी के लिए रक्तचाप नापने का इंस्ट्रूमेंट मैंने मंगवाया था ! वो बहुत काम आया ! आश्रम में बहुत से लोंगो के लिए उपयोगी साबित हुआ ! बहुत से लोग अपना बढ़ा या घटा वीपी देख उसे स्वीकारने और डॉक्टर के पास जाने के लिए बहुत मुश्किल से तैयार हुए ! भगवान के बाद डॉक्टर ही धरती के भगवान हैं,परन्तु हमारे देश में डॉक्टरों के प्रति लोंगो का नजरिया बहुत नकारात्मक है ! सरकार को चाहिए कि हर गली मोहल्ले में कम से कम महीने में एक बार स्वास्थ्य शिविर लगाये ! भारत में अभी लोग डॉक्टरों के पास गंभीर स्थिति होने पर या फिर लगभग लाश बन जाने पर ही जाते हैं ! उस समय उसे बचाने या ठीक करने के डॉकटरों के पास भी बहुत सिमित विकल्प होते है ! उपयोगी प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार !

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डॉ. साहब, सादर अभिवादन! अच्छे और ज्ञानपरक आलेख के लिए बधाई! वैसे मेरी समझ से नशा करनेवाले पर शायद ही फर्क पड़े. बजट सुनने के बाद ही सुनने में आया की इन वस्तुओं की कालाबाजारी शुरू हो गयी है और लोग दुगने दाम देकर भी खरीद रहे हैं भले ही वे टमाटर प्याज पर आंसू बहा लेते हैं. मुझे तो ऐसे लोगों से सख्त चिढ़होती है पर क्या करून मेरे बहुत सारे मित्र नशेड़ी हैं और उनके मुंह की बदबू मुझे बड़ी अप्रिय लगती है...पर क्या करूँ ...उन्ही लोगों के बीच रहना है...कोशिश करता हूँ, उन्हें समझाने का ..अगर गरीब लोग इस नशे से मुक्त हो जाएँ तो अच्छा है पर नशेड़ी लोगों में दोस्ती भी गजब की होती है यहाँ लोग स्तर नहीं देखते ...बहरहाल सरकार की आय बढ़ने वाली है...

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